मैनपुरी. उत्तर प्रदेश में 24 साल बाद सपा नेता मुलायम सिंह यादव और बसपा प्रमुख मायावती एक मंच पर नजर आए। मैनपुरी में दोनों दलों की संयुक्त रैली में मायावती ने मुलायम के लिए प्रचार किया। मायावती ने कहा- मुलायम सिंह जी असली, वास्तविक हैं। वे भाजपा की तरह नकली या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह फर्जी रूप से पिछड़े वर्ग के नहीं हैं। मुलायम को मैनपुर में आप रिकॉर्ड तोड़ वोटों से जिताएं।
वहीं, मुलायम सिंह ने इस रैली में मायावती का आभार जताया। कहा- बहुत दिनों बाद साथ आने के लिए मायावतीजी का अभिनंदन करता हूं। उम्मीद है कि सपा-बसपा का गठबंधन राज्य में भारी मतों से जीतेगा। आज मायावतीजी आई हैं। उनका हम स्वागत करते हैं, आदर करते हैं। मायावती जी का बहुत सम्मान करना हमेशा, क्योंकि समय जब भी आया है, मायावती जी ने हमारा साथ दिया है। हमें खुशी है कि हमारे समर्थन के लिए वे आईं हैं।
चौकीदारी की नाटकबाजी भी मोदी को नहीं बचा पाएगी- मायावती
मायावती ने कहा, "नकली पिछड़ा व्यक्ति कभी भी देश भला नहीं कर सकता। नकली पिछड़े लोगों से धोखा खाने की जरूरत नहीं है। असली-नकली कौन है, इसकी पहचान कर ही अपने गठबंधन को कामयाब बनाना है। पिछड़ों के असली नेता मुलायम जी को ही चुनकर भेजना है।'
"आजादी के बाद काफी लंबे समय तक देश में ज्यादातर सत्ता कांग्रेस और उसके बाद भाजपा या अन्य पार्टियों के हाथ में रही। भाजपा की संकीर्णवादी, सांप्रदायिक नीतियों की वजह से उनकी सरकार वापस चली जाएगी। उनकी चौकीदारी की नाटकबाजी भी नहीं बचा पाएगी।'
"मोदी ने पिछले चुनाव में कई चुनावी वादे किए थे। उन्होंने कहा था कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद विदेशों में जमा काला धन वापस देश के हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख रुपए डाले जाएंगे। क्या किसी को भी ये रुपए मिले?'
"कांग्रेस पार्टी क्या कर रही है। वे पूरे देश में घूम-घूमकर कह रहे हैं कि सत्ता में आने के बाद गरीबों को आर्थिक मदद की जाएगी। इस थोड़ी सी आर्थिक मदद से आपका भला नहीं होने वाला। हम गरीबों को स्थायी नौकरी देंगे।''
हमें नया प्रधानमंत्री चाहिए-अखिलेश
अखिलेश ने कहा, "आज ऐतिहासिक क्षण है। मायावती ने जनता से अपील की है कि नेताजी को बहुमत से जिताएं। मुझे पूरा भरोसा है कि नेताजी ने जिस तरह से हमें जगाने का काम किया, उन्हें मैनपुरी की जनता ऐतिहासिक मतों से जिताने जा रही है।''
"इस देश की खेती और किसान आत्मा है। लोगों के रोजगार खत्म हो गए। यह चुनाव दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यकों के लिए है। हमें नया प्रधानमंत्री बनाना है। जब नया प्रधानमंत्री बनेगा, तभी देश नया बनेगा। भाजपा ने नोटबंदी-जीएसटी लाकर देश को अंधेरे में डाल दिया।''
"अगर ग्रामीण जनता का किसी ने विकास हुआ है तो सपा-बसपा की सरकार ने किया है। हमने दिल्ली पास कर दी। क्या आपका फर्ज नहीं कि सपा-बसपा-रालोद के लिए दिल्ली पास लाकर दिखाएं।''
अजित सिंह नजर नहीं आए
सभा में माया-मुलायम के अलावा अखिलेश यादव भी मौजूद रहे। रालोद प्रमुख अजित सिंह नहीं पहुंच सके। 1995 में सपा-बसपा ने गठबंधन करके विधानसभा चुनाव लड़ा था, इसके बाद गेस्ट हाउस कांड के कारण दोनों दलों में दूरियां हो गईं थीं।
मैनपुरी की सभा से पहले महागठबंधन की तीन रैलियां (सहारनपुर, बदायूं और आगरा) हो चुकी हैं। इनमें से आगरा की रैली में मायावती चुनाव आयोग की रोक के कारण नहीं पहुंची थीं, उनकी जगह उनके भतीजे आकाश आनंद ने सभा को संबोधित किया था। अखिलेश और मायावती आज ही बरेली में भी एक सभा करेंगे।
गठबंधन की संयुक्त रैलियां
20 अप्रैल को रामपुर और फिरोजाबाद में, 25 अप्रैल कन्नौज, 1 मई को फैजाबाद, 8 मई को आजमगढ़, 13 मई को गोरखपुर में गठबंधन की रैली होंगी। लोकसभा चुनाव के लिए महागबंधन की आखिरी रैली 16 मई को वाराणसी में होगी। गठबंधन की ओर से 11 सीटों के लिए हो रहीं 11 साझा रैलियों में से मैनपुरी, कन्नौज, बदायूं, फिरोजाबाद और आजमगढ़ अभी मुलायम सिंह के परिवार के पास हैं। सहारनपुर और आगरा बसपा के खाते में है।
Friday, April 19, 2019
Monday, April 15, 2019
पाकिस्तान में दूध की क़ीमत 180 रुपए लीटर: प्रेस रिव्यू
महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान में आम लोगों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं. दैनिक हिंदुस्तान की ख़बर के मुकाबिक़, पाकिस्तान में रोज़ाना ज़रूरत की चीज़ों के दाम आसमान छू रहे हैं.
सब्ज़ियों और पेट्रोल और डीज़ल के दाम तो पहले से ही बढ़े हुए थे और अब इसमें दूध के दाम भी शामिल हो गए हैं. अख़बार लिखता है कि पाकिस्तान में इस समय दूध 120 से 180 रुपये लीटर तक बिक रहा है.
कराची डेयरी फ़ार्मर्स एसोसिएशन ने दूध के दाम में 23 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी कर दी है. एसोसिएशन का कहना है कि पशुओं को खिलाए जाने वाले चारे और ईंधन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं इसलिए दूध के दाम बढ़ाना मजबूरी थी.
इसी अख़बार ने छापा है कि घाटी से जैश नेतृत्व साफ़ हो गया. अख़बार ने यह ख़बर सेना के हवाले से लिखा है. अख़बार लिखता है कि सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कश्मीर घाटी से आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के नेतृत्व का सफाया कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि सेना किश्तवाड़ समेत जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद को दोबारा सिर नहीं उठाने देगी.
नवभारत टाइम्स ने इस ख़बर को प्रमुखता से अपने पन्ने पर लिया है. अख़बार लिखता है कि यूं तो प्रियंका ने जिस दिन सक्रिय राजनीति में क़दम रखा उसी दिन से कयास लगने लगे थे कि वो चुनाव लड़ सकती हैं.
हालांकि वो मना कर चुकी हैं और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी इसे प्रियंका का फ़ैसला बता चुके हैं लेकिन एक बार फिर इसकी संभावनाएं नज़र आ रही हैं.
चुनाव प्रचार को दौरान जब एक पत्रकार ने प्रियंका से पूछा कि क्या वो चुनाव लड़ रही हैं तो उन्होंने उल्टा सवाल दागते हुए कहा क्या वाराणसी से लडूं?
प्रियंका गांधी ने कहा कि वह चुनाव में खड़े होने के लिए तैयार हैं लेकिन जब पार्टी कहेगी.
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के निर्देश पर हो रही सीलिंग के विरोध के दौरान हुई झड़प में तीस लोग घायल हो गए हैं. शनिवार सुबह दक्षिणी दिल्ली के मायापुरी इलाक़े में स्थानीय दुकानदारों ने सीलिंग की कार्रवाई का विरोध किया. अधिकारी यहां अवैध कबाड़ यूनिटों को बंद करने आए थे. इस दौरान पुलिसबलों और स्थानीय लोगों में झड़पें हो गईं और अफ़रातफ़री का माहौल रहा.
सब्ज़ियों और पेट्रोल और डीज़ल के दाम तो पहले से ही बढ़े हुए थे और अब इसमें दूध के दाम भी शामिल हो गए हैं. अख़बार लिखता है कि पाकिस्तान में इस समय दूध 120 से 180 रुपये लीटर तक बिक रहा है.
कराची डेयरी फ़ार्मर्स एसोसिएशन ने दूध के दाम में 23 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी कर दी है. एसोसिएशन का कहना है कि पशुओं को खिलाए जाने वाले चारे और ईंधन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं इसलिए दूध के दाम बढ़ाना मजबूरी थी.
इसी अख़बार ने छापा है कि घाटी से जैश नेतृत्व साफ़ हो गया. अख़बार ने यह ख़बर सेना के हवाले से लिखा है. अख़बार लिखता है कि सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कश्मीर घाटी से आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के नेतृत्व का सफाया कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि सेना किश्तवाड़ समेत जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद को दोबारा सिर नहीं उठाने देगी.
नवभारत टाइम्स ने इस ख़बर को प्रमुखता से अपने पन्ने पर लिया है. अख़बार लिखता है कि यूं तो प्रियंका ने जिस दिन सक्रिय राजनीति में क़दम रखा उसी दिन से कयास लगने लगे थे कि वो चुनाव लड़ सकती हैं.
हालांकि वो मना कर चुकी हैं और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी इसे प्रियंका का फ़ैसला बता चुके हैं लेकिन एक बार फिर इसकी संभावनाएं नज़र आ रही हैं.
चुनाव प्रचार को दौरान जब एक पत्रकार ने प्रियंका से पूछा कि क्या वो चुनाव लड़ रही हैं तो उन्होंने उल्टा सवाल दागते हुए कहा क्या वाराणसी से लडूं?
प्रियंका गांधी ने कहा कि वह चुनाव में खड़े होने के लिए तैयार हैं लेकिन जब पार्टी कहेगी.
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के निर्देश पर हो रही सीलिंग के विरोध के दौरान हुई झड़प में तीस लोग घायल हो गए हैं. शनिवार सुबह दक्षिणी दिल्ली के मायापुरी इलाक़े में स्थानीय दुकानदारों ने सीलिंग की कार्रवाई का विरोध किया. अधिकारी यहां अवैध कबाड़ यूनिटों को बंद करने आए थे. इस दौरान पुलिसबलों और स्थानीय लोगों में झड़पें हो गईं और अफ़रातफ़री का माहौल रहा.
Monday, April 8, 2019
बांग्लादेश में ख़ूबसूरत दिखने का ये कौन सा फ़ैशन
बांग्लादेश में ख़ूबसूरत दिखने के दबाव को कैमरे में क़ैद करने वाली 29 साल की हबीबा नवरोज़ कहती हैं, "महिला होने के नाते आम तौर पर ख़ुद को ख़ूबसूरत दिखाने का हम पर दबाव रहता है."
"और ख़ूबसरती हासिल करने के क्रम में हमारा व्यक्तित्व भी छीन लिया जाता है. यहां तक कि हम ख़ुद के लिए अनजान हो जाते हैं और हमारी पहचान गुम हो जाती है."
हबीबा की तस्वीरों में महिलाएं चमक और रंग से भरपूर दिखती हैं लेकिन उनका चेहरा पूरी तरह ढंका है.
ये दिखाता है कि भले बाहर से बेहद ख़ूबसूरत दिखने के लिए उन्होंने काफ़ी मेहनत की है, लेकिन उनका आत्मविश्वास ख़त्म हो चुका है.
हबीबा इस ओर सबका ध्यान आकर्षित करना चाहती हैं कि दूसरों को ख़ुश रखने के लिए बांग्लादेशी महिलाओं को कितना कुछ समझौता करना पड़ता है.
बीबीसी बंगाली से बात करते हुए हबीबा कहती हैं कि ये आईडिया अपने एक "बहुत कड़वे निजी अनुभव" के बाद आया.
"मैं जब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हुई, मैंने पाया कि लोग मुझसे बहुत अधिक उम्मीद रखने लगे थे. मुझे शादी करनी थी, मां बनना था, अच्छे वेतन वाली नौकरी पानी थी. अपने आस पास की अधिकांश लड़कियों के साथ ये होते हुए मैं देख चुकी हूं- वो अपने लिए असल में क्या चाहती हैं, उसे भूल जाने को मजबूर होना पड़ता है. "
एक फ़ोटोग्राफ़र के रूप में पहले साल हबीबा ने महसूस किया कि वो चाहे जितना मेहनत करें, ये काफ़ी नहीं है, "अगर आप महिला हैं और ख़ुद को साबित करना चाहती हैं, तो आपको मर्दों के मुक़ाबले दोगुनी मेहनत करनी होगी."
वो कहती हैं, "मुझे लगा कि एक इंसान के रूप में मैं ख़ुद से दूर होती जा रही हूं. इसके बाद मैंने ख़ुद को ख़ुश रखने की कोशिशें शुरू कीं, यानी ख़ुद से ईमानदार रहने की."
फ़ोटोग्राफ़र के रूप में क़रीब 6 साल पहले हबीबा ने एक सिरीज़ शुरू की, 'कन्सील्ड'.
वो कहती हैं, "इस एहसास को हटाने और लोगों की उम्मीदों को नकारने के एक तरीक़े के रूप में मैंने ये सिरीज़ शुरू की."
जब 2016 में हबीबा ने ढाका में अपनी तस्वीरों की एक प्रदर्शनी लगाई तो बहुत से लोगों का ध्यान गया.
कुल मिलाकर कला जगत में महिलाएं उनका संदेश समझ गईं, लेकिन कलादीर्घा संभालने वाले पुरुषों को अक्सर थोड़ा और समझाने की ज़रूरत पड़ती है.
वो कहती हैं, "महिलाएं इस बात को समझ गईं, कि मैं क्या बात कर रही हूं, क्योंकि इन अनुभवों से वो होकर गुज़री हैं. लेकिन स्वाभाविक तौर पर पुरुषों के साथ ऐसा मामला नहीं है."
हबीबा कहती हैं कि 'बांग्लादेश में महिला फ़ोटोग्राफ़र बहुत नहीं हैं, ये भी एक समस्या है. लेकिन चीज़ें अब बदल रही हैं.'
"और ख़ूबसरती हासिल करने के क्रम में हमारा व्यक्तित्व भी छीन लिया जाता है. यहां तक कि हम ख़ुद के लिए अनजान हो जाते हैं और हमारी पहचान गुम हो जाती है."
हबीबा की तस्वीरों में महिलाएं चमक और रंग से भरपूर दिखती हैं लेकिन उनका चेहरा पूरी तरह ढंका है.
ये दिखाता है कि भले बाहर से बेहद ख़ूबसूरत दिखने के लिए उन्होंने काफ़ी मेहनत की है, लेकिन उनका आत्मविश्वास ख़त्म हो चुका है.
हबीबा इस ओर सबका ध्यान आकर्षित करना चाहती हैं कि दूसरों को ख़ुश रखने के लिए बांग्लादेशी महिलाओं को कितना कुछ समझौता करना पड़ता है.
बीबीसी बंगाली से बात करते हुए हबीबा कहती हैं कि ये आईडिया अपने एक "बहुत कड़वे निजी अनुभव" के बाद आया.
"मैं जब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हुई, मैंने पाया कि लोग मुझसे बहुत अधिक उम्मीद रखने लगे थे. मुझे शादी करनी थी, मां बनना था, अच्छे वेतन वाली नौकरी पानी थी. अपने आस पास की अधिकांश लड़कियों के साथ ये होते हुए मैं देख चुकी हूं- वो अपने लिए असल में क्या चाहती हैं, उसे भूल जाने को मजबूर होना पड़ता है. "
एक फ़ोटोग्राफ़र के रूप में पहले साल हबीबा ने महसूस किया कि वो चाहे जितना मेहनत करें, ये काफ़ी नहीं है, "अगर आप महिला हैं और ख़ुद को साबित करना चाहती हैं, तो आपको मर्दों के मुक़ाबले दोगुनी मेहनत करनी होगी."
वो कहती हैं, "मुझे लगा कि एक इंसान के रूप में मैं ख़ुद से दूर होती जा रही हूं. इसके बाद मैंने ख़ुद को ख़ुश रखने की कोशिशें शुरू कीं, यानी ख़ुद से ईमानदार रहने की."
फ़ोटोग्राफ़र के रूप में क़रीब 6 साल पहले हबीबा ने एक सिरीज़ शुरू की, 'कन्सील्ड'.
वो कहती हैं, "इस एहसास को हटाने और लोगों की उम्मीदों को नकारने के एक तरीक़े के रूप में मैंने ये सिरीज़ शुरू की."
जब 2016 में हबीबा ने ढाका में अपनी तस्वीरों की एक प्रदर्शनी लगाई तो बहुत से लोगों का ध्यान गया.
कुल मिलाकर कला जगत में महिलाएं उनका संदेश समझ गईं, लेकिन कलादीर्घा संभालने वाले पुरुषों को अक्सर थोड़ा और समझाने की ज़रूरत पड़ती है.
वो कहती हैं, "महिलाएं इस बात को समझ गईं, कि मैं क्या बात कर रही हूं, क्योंकि इन अनुभवों से वो होकर गुज़री हैं. लेकिन स्वाभाविक तौर पर पुरुषों के साथ ऐसा मामला नहीं है."
हबीबा कहती हैं कि 'बांग्लादेश में महिला फ़ोटोग्राफ़र बहुत नहीं हैं, ये भी एक समस्या है. लेकिन चीज़ें अब बदल रही हैं.'
Friday, April 5, 2019
मोदी ने कहा- नेता पुत्र का चुनाव लड़ना वंशवाद नहीं, एक ही परिवार से पार्टी मुखिया बनना वंशवाद
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीति में वंशवाद की व्याख्या की है। न्यूज चैनल एबीपी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि नेता का बेटा चुनाव लड़े तो इसे वंशवाद नहीं कहा जा सकता। हालांकि उन्होंने इसे भी रोके जाने की बात कही। मोदी के मुताबिक- किसी परिवार के सदस्य का पार्टी का मुखिया बनना वंशवाद है।
सवाल: कांग्रेस ये आरोप लगा रही है कि आज सरकार की आलोचना करना राष्ट्रद्रोह है?
मोदी: न्यायालय पर भरोसा रखना चाहिए।
सवाल: कश्मीर में गठबंधन क्यों खत्म कर दिया?
मोदी: जब हम हमने गठबंधन किया तब मुफ्ती मोहम्मद सईद थे। गठबंधन मिलावटी साबित हुआ। हमने सरकार चलाने की कोशिश की। महबूबा जी के काम करने का तरीका अलग है। हमारा मत था कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय निकाय के चुनाव होने चाहिए। पंचायतों को पैसे दिए जाने चाहिए। वे नहीं चाहते थे कि पंचायतों की ताकत बढ़े। उन्होंने डर पैदा करने की कोशिश की कि चुनाव होने पर हत्याएं होंगी। इसके बाद हम अलग हो गए। हमारी कोशिश थी कि गठबंधन में अच्छा करें।
सवाल: कश्मीर को बेहतर ढंग से हैंडल करना चाहिए था, इसमें क्या सरकार असफल रही?
मोदी: जब हम जम्मू कश्मीर की बात करते हैं तो हमें घाटी, लद्दाख की भी बात करनी चाहिए थी। वहां घटनाएं कम हो रही है। जम्मू-कश्मीर के हर घर में बिजली और शौचालय की सुविधा उपलब्ध हो गई। कृषि, खादी व्यवसाय में वृद्धि हुई। अमरनाथ, वैष्णो देवी के पर्यटक बढ़ रहे हैं। स्पोर्ट्स में वहां के बच्चे अच्छा कर रहे हैं। अलगाववादियों के प्रति नरमी अब सही नहीं होगी। हम उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। दो-तीन जिलों में ही वे सक्रिय हैं। वहां से भी हटाया जाएगा।
सवाल: पाकिस्तान को लेकर क्या सोचते हैं?
मोदी: मेरा काम भारत के हितों की रक्षा करना है, पाकिस्तान चलाना मेरी जिम्मेदारी नहीं। पाकिस्तान में पता ही नहीं चलता कि देश कौन चलाता है। सेना, आईएसआई, चुनी हुई सरकार या पाक से भागे हुए लोग देश चलाते हैं। यह भी पता नहीं चलता कि बात किससे करें? वे आतंक का निर्यात करना बंद करें। चीन का साथ हमारे सीमा विवाद है, लेकिन व्यवसाय और राजनीतिक बातें होती हैं।
सवाल: आपको गांधी-नेहरू परिवार से दिक्कत क्या है?
मोदी: मैं चाहूंगा कि इस प्रकार से सहानुभूति हासिल करने के लिए वे जो ड्रामेबाजी कर रहे हैं, वे बताएं कि मैंने क्या किया? लालूजी जेल में हैं, लेकिन केस तो कांग्रेस के काल में शुरू हुआ था। इसमें मेरा क्या दोष है? मैंने देश से कहा है कि लूटने वालों से पाई-पाई वापस लूंगा? नेशनल हेराल्ड का केस भी मेरे आने से पहले शुरू हुआ था, लेकिन दबा दिया गया। मैं तो बस कानूनी काम कर रहा हूं। देश के एक वित्त मंत्री को आज कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
सवाल: गांधी भाई-बहनों में बेहतर कौन है?
मोदी: कांग्रेस पार्टी सवा सौ साल से ज्यादा पुरानी है। इस पार्टी का ऐसा क्या दरिद्र है कि उसके अंदर से नेता नहीं उभरते। मैं उनसे मिला नहीं, उन्हें निजी तौर पर नहीं जानता, इसलिए कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।
सवाल: वाराणसी से प्रियंका के चुनाव लड़ने की खबरें हैं?
मोदी: लोकतंत्र में कोई कहीं से भी चुनाव लड़ सकता है।
सवाल: आप भी दो सीटों से चुनाव लड़े थे लेकिन राहुल के दो सीटों से चुनाव लड़ने पर विवाद हो रहा है?
मोदी: कौन कहां से चुनाव लड़ता है, वह उनका निर्णय है। अमेठी से उनको (राहुल गांधी) भागना क्यों पड़ा, ये देश जानना चाहता है।
सवाल: वंशवाद को लेकर क्या कहेंगे?
मोदी: अगर भारतीय जनता पार्टी बुरे रास्ते पर चलेगी तो हम दूसरे से शिकायत नहीं कर सकते। कांग्रेस से लोगों को अपेक्षा है। बाबा साहब अंबेडकर ने 1937 में कहा था कि वंशवाद लोकतंत्र के लिए खतरा है। उस वक्त तो मोदी पैदा भी नहीं हुआ था। मैंने कभी किसी का नाम नहीं लिया। नेता का बेटा चुनाव लड़े, वह वंशवाद नहीं है। पार्टी का मुखिया बार-बार किसी परिवार का सदस्य ही बने, यह वंशवाद है। हम अपने गठबंधन के साथियों से भी परिवारवाद से दूर रहने को कहते हैं।
सवाल: कांग्रेस ये आरोप लगा रही है कि आज सरकार की आलोचना करना राष्ट्रद्रोह है?
मोदी: न्यायालय पर भरोसा रखना चाहिए।
सवाल: कश्मीर में गठबंधन क्यों खत्म कर दिया?
मोदी: जब हम हमने गठबंधन किया तब मुफ्ती मोहम्मद सईद थे। गठबंधन मिलावटी साबित हुआ। हमने सरकार चलाने की कोशिश की। महबूबा जी के काम करने का तरीका अलग है। हमारा मत था कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय निकाय के चुनाव होने चाहिए। पंचायतों को पैसे दिए जाने चाहिए। वे नहीं चाहते थे कि पंचायतों की ताकत बढ़े। उन्होंने डर पैदा करने की कोशिश की कि चुनाव होने पर हत्याएं होंगी। इसके बाद हम अलग हो गए। हमारी कोशिश थी कि गठबंधन में अच्छा करें।
सवाल: कश्मीर को बेहतर ढंग से हैंडल करना चाहिए था, इसमें क्या सरकार असफल रही?
मोदी: जब हम जम्मू कश्मीर की बात करते हैं तो हमें घाटी, लद्दाख की भी बात करनी चाहिए थी। वहां घटनाएं कम हो रही है। जम्मू-कश्मीर के हर घर में बिजली और शौचालय की सुविधा उपलब्ध हो गई। कृषि, खादी व्यवसाय में वृद्धि हुई। अमरनाथ, वैष्णो देवी के पर्यटक बढ़ रहे हैं। स्पोर्ट्स में वहां के बच्चे अच्छा कर रहे हैं। अलगाववादियों के प्रति नरमी अब सही नहीं होगी। हम उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। दो-तीन जिलों में ही वे सक्रिय हैं। वहां से भी हटाया जाएगा।
सवाल: पाकिस्तान को लेकर क्या सोचते हैं?
मोदी: मेरा काम भारत के हितों की रक्षा करना है, पाकिस्तान चलाना मेरी जिम्मेदारी नहीं। पाकिस्तान में पता ही नहीं चलता कि देश कौन चलाता है। सेना, आईएसआई, चुनी हुई सरकार या पाक से भागे हुए लोग देश चलाते हैं। यह भी पता नहीं चलता कि बात किससे करें? वे आतंक का निर्यात करना बंद करें। चीन का साथ हमारे सीमा विवाद है, लेकिन व्यवसाय और राजनीतिक बातें होती हैं।
सवाल: आपको गांधी-नेहरू परिवार से दिक्कत क्या है?
मोदी: मैं चाहूंगा कि इस प्रकार से सहानुभूति हासिल करने के लिए वे जो ड्रामेबाजी कर रहे हैं, वे बताएं कि मैंने क्या किया? लालूजी जेल में हैं, लेकिन केस तो कांग्रेस के काल में शुरू हुआ था। इसमें मेरा क्या दोष है? मैंने देश से कहा है कि लूटने वालों से पाई-पाई वापस लूंगा? नेशनल हेराल्ड का केस भी मेरे आने से पहले शुरू हुआ था, लेकिन दबा दिया गया। मैं तो बस कानूनी काम कर रहा हूं। देश के एक वित्त मंत्री को आज कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
सवाल: गांधी भाई-बहनों में बेहतर कौन है?
मोदी: कांग्रेस पार्टी सवा सौ साल से ज्यादा पुरानी है। इस पार्टी का ऐसा क्या दरिद्र है कि उसके अंदर से नेता नहीं उभरते। मैं उनसे मिला नहीं, उन्हें निजी तौर पर नहीं जानता, इसलिए कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।
सवाल: वाराणसी से प्रियंका के चुनाव लड़ने की खबरें हैं?
मोदी: लोकतंत्र में कोई कहीं से भी चुनाव लड़ सकता है।
सवाल: आप भी दो सीटों से चुनाव लड़े थे लेकिन राहुल के दो सीटों से चुनाव लड़ने पर विवाद हो रहा है?
मोदी: कौन कहां से चुनाव लड़ता है, वह उनका निर्णय है। अमेठी से उनको (राहुल गांधी) भागना क्यों पड़ा, ये देश जानना चाहता है।
सवाल: वंशवाद को लेकर क्या कहेंगे?
मोदी: अगर भारतीय जनता पार्टी बुरे रास्ते पर चलेगी तो हम दूसरे से शिकायत नहीं कर सकते। कांग्रेस से लोगों को अपेक्षा है। बाबा साहब अंबेडकर ने 1937 में कहा था कि वंशवाद लोकतंत्र के लिए खतरा है। उस वक्त तो मोदी पैदा भी नहीं हुआ था। मैंने कभी किसी का नाम नहीं लिया। नेता का बेटा चुनाव लड़े, वह वंशवाद नहीं है। पार्टी का मुखिया बार-बार किसी परिवार का सदस्य ही बने, यह वंशवाद है। हम अपने गठबंधन के साथियों से भी परिवारवाद से दूर रहने को कहते हैं।
Monday, March 25, 2019
कांग्रेस को झटका, राशिद अल्वी बोले- नहीं लडूंगा चुनाव, सचिन चौधरी को मिला टिकट
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता राशिद अल्वी ने सोमवार को कहा कि वे स्वास्थ्य कारणों की वजह से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने की सूचना पार्टी आलाकमान को भेज दी है. राशिद अल्वी अमरोहा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी हैं. इसके बाद कांग्रेस ने सचिन चौधरी को अमरोहा का नया उम्मीदवार बनाया है. हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस की पहली सूची में नाम नहीं होने की वजह से राशिद अल्वी नाराज चल रहे थे. उनका नाम पार्टी की 8वीं सूची में आया था. अमरोहा सीट से भाजपा ने कंवर सिंह तंवर और बसपा ने दानिश अली को मैदान में उतारा है. इस लोकसभा चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ है जब पार्टी द्वारा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद किसी उम्मीदवार ने अपना नाम मैदान से वापस लिया है.
कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता राशिद अल्वी 1999 से 2004 तक सांसद रहे. इसके अलावा दो बार उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं. पिछले महीने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यूपी का किला फतह करने के लिए कुछ 6 समितियां बनाई थीं. इन समितियों में कुल 92 लोग हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जिन छह समितियों के गठन को मंजूरी दी है, उनमें चुनाव समिति, प्रचार अभियान समिति, चुनाव रणनीति और योजना समिति, समन्वय समिति, घोषणापत्र समिति और मीडिया एवं प्रचार समिति शामिल है.
राशिद अल्वी मैनिफेस्टो कमेटी के चेयरमैन बनाए गए थे
कांग्रेस अध्यक्ष ने राशिद अल्वी को मैनिफेस्टो कमेटी का चेयरमैन बनाया है. इस कमेटी में कुल 10 सदस्य हैं. इनमें पूर्व मंत्री प्रदीप जैन, पूर्व मंत्री जितिन प्रसाद, पूर्व एमपी बृजलाल खाबरी, पूर्व विधायक गजराज सिंह और हफीजुर्रहमान, पूर्व एमएलसी हरेंद्र अग्रवाल, रिसर्च विभाग के संयुक्त सचिव हर्षवर्धन श्याम, प्रदेश यूथ कांग्रेस (पूर्वी जोन) के अध्यक्ष नीरज त्रिपाठी और एनएसयूआई पश्चिम जोन के अध्यक्ष रोहित राणा शामिल हैं.
पश्चिमी यूपी की चार सीटों पर कांग्रेस ने उतारे मुस्लिम प्रत्याशी
कांग्रेस ने अपने मुस्लिम प्रत्याशियों के जरिए सपा-बसपा गठजोड़ का करारा जवाब दिया था. कांग्रेस ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चार लोकसभा सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे. मुरादाबाद, बिजनौर, सहारनपुर और अमरोहा चार ऐसे लोकसभा क्षेत्र हैं, जहां से कांग्रेस ने मुस्लिम चेहरों को मौका दिया है. मुरादाबाद से इमरान प्रतापगढ़ी, बिजनौर से नसीमुद्दीन सिद्दीकी, सहारनपुर से इमरान मसूद और अमरोहा से राशिद अलवी को टिकट दिया गया है. ये चारों सिर्फ प्रत्याशी भर नहीं हैं, बल्कि इनकी अपनी अलग खास पहचान भी है. अब इनमें से एक राशिद अल्वी ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता राशिद अल्वी पूरे देश में अपनी पहचान रखते हैं.
राशिद के चुनाव नहीं लड़ने से कांग्रेस को बड़ा झटका
अब तक मायावाती लगातार कांग्रेस पर हमले कर रही थीं. इसके जवाब में कांग्रेस ने चार मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतार दिए थे. राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो जिन लोकसभा सीटों पर 20 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी है, और वहां गठबंधन का कोई मुस्लिम उम्मीदवार नहीं है, वहां कांग्रेस ने अपने मजबूत मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की रणनीति अपनाई है. लेकिन राशिद अगर चुनाव नहीं लड़ेंगे तो मायावती की पार्टी बसपा के अमरोहा प्रत्याशी दानिश अली के जीतने की उम्मीद बढ़ जाएंगी. पश्चिमी यूपी में कांग्रेस के मुस्लिम उम्मीदवारों वाली रणनीति सपा-बसपा गठबंधन को नुकसान पहुंचाने वाली थी, लेकिन अब राशिद अल्वी के जाने के बाद गठबंधन को अच्छा मौका मिल सकता है.
चारों सीटों पर मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा निर्णायक
पश्चिमी यूपी के चारों लोकसभा क्षेत्रों में मुसलमान वोट न सिर्फ निर्णायक भूमिका में है, बल्कि वह नेतृत्व करता भी नजर आता है. मुरादाबाद सीट पर 45 फीसदी, बिजनौर सीट पर 38 फीसदी, सहारनपुर सीट पर 39 फीसदी और अमरोहा सीट 37 फीसदी मुसलमान है.
कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता राशिद अल्वी 1999 से 2004 तक सांसद रहे. इसके अलावा दो बार उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं. पिछले महीने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यूपी का किला फतह करने के लिए कुछ 6 समितियां बनाई थीं. इन समितियों में कुल 92 लोग हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जिन छह समितियों के गठन को मंजूरी दी है, उनमें चुनाव समिति, प्रचार अभियान समिति, चुनाव रणनीति और योजना समिति, समन्वय समिति, घोषणापत्र समिति और मीडिया एवं प्रचार समिति शामिल है.
राशिद अल्वी मैनिफेस्टो कमेटी के चेयरमैन बनाए गए थे
कांग्रेस अध्यक्ष ने राशिद अल्वी को मैनिफेस्टो कमेटी का चेयरमैन बनाया है. इस कमेटी में कुल 10 सदस्य हैं. इनमें पूर्व मंत्री प्रदीप जैन, पूर्व मंत्री जितिन प्रसाद, पूर्व एमपी बृजलाल खाबरी, पूर्व विधायक गजराज सिंह और हफीजुर्रहमान, पूर्व एमएलसी हरेंद्र अग्रवाल, रिसर्च विभाग के संयुक्त सचिव हर्षवर्धन श्याम, प्रदेश यूथ कांग्रेस (पूर्वी जोन) के अध्यक्ष नीरज त्रिपाठी और एनएसयूआई पश्चिम जोन के अध्यक्ष रोहित राणा शामिल हैं.
पश्चिमी यूपी की चार सीटों पर कांग्रेस ने उतारे मुस्लिम प्रत्याशी
कांग्रेस ने अपने मुस्लिम प्रत्याशियों के जरिए सपा-बसपा गठजोड़ का करारा जवाब दिया था. कांग्रेस ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चार लोकसभा सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे. मुरादाबाद, बिजनौर, सहारनपुर और अमरोहा चार ऐसे लोकसभा क्षेत्र हैं, जहां से कांग्रेस ने मुस्लिम चेहरों को मौका दिया है. मुरादाबाद से इमरान प्रतापगढ़ी, बिजनौर से नसीमुद्दीन सिद्दीकी, सहारनपुर से इमरान मसूद और अमरोहा से राशिद अलवी को टिकट दिया गया है. ये चारों सिर्फ प्रत्याशी भर नहीं हैं, बल्कि इनकी अपनी अलग खास पहचान भी है. अब इनमें से एक राशिद अल्वी ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता राशिद अल्वी पूरे देश में अपनी पहचान रखते हैं.
राशिद के चुनाव नहीं लड़ने से कांग्रेस को बड़ा झटका
अब तक मायावाती लगातार कांग्रेस पर हमले कर रही थीं. इसके जवाब में कांग्रेस ने चार मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतार दिए थे. राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो जिन लोकसभा सीटों पर 20 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी है, और वहां गठबंधन का कोई मुस्लिम उम्मीदवार नहीं है, वहां कांग्रेस ने अपने मजबूत मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की रणनीति अपनाई है. लेकिन राशिद अगर चुनाव नहीं लड़ेंगे तो मायावती की पार्टी बसपा के अमरोहा प्रत्याशी दानिश अली के जीतने की उम्मीद बढ़ जाएंगी. पश्चिमी यूपी में कांग्रेस के मुस्लिम उम्मीदवारों वाली रणनीति सपा-बसपा गठबंधन को नुकसान पहुंचाने वाली थी, लेकिन अब राशिद अल्वी के जाने के बाद गठबंधन को अच्छा मौका मिल सकता है.
चारों सीटों पर मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा निर्णायक
पश्चिमी यूपी के चारों लोकसभा क्षेत्रों में मुसलमान वोट न सिर्फ निर्णायक भूमिका में है, बल्कि वह नेतृत्व करता भी नजर आता है. मुरादाबाद सीट पर 45 फीसदी, बिजनौर सीट पर 38 फीसदी, सहारनपुर सीट पर 39 फीसदी और अमरोहा सीट 37 फीसदी मुसलमान है.
Monday, March 18, 2019
नाकाम चीजों को संजोने वाला म्यूज़ियम
पर, इस दुनिया को कामबायी का नशा है. इस क़दर नशा है कि हर नाकामी को भुला दिया जाता है. जबकि लोग नाकामियों से ही सीख कर कामयाब होते आए हैं.
इसीलिए, स्वीडन में एक ख़ास म्यूज़ियम खोला गया है, म्यूज़ियम ऑफ़ फेल्योर, यानी नाकामी का अजायबघर.
ये विचित्र म्यूज़ियम स्वीडन के हेलसिंगबोर्ग शहर में है. इस म्यूज़ियम का रख-रखाव करने वाले सैमुअल वेस्ट कहते हैं कि, 'इस म्यूज़ियम का हिस्सा बनने की पहली शर्त है कि कोई भी चीज़ एक आविष्कार होनी चाहिए. दूसरी शर्त है कि उसे नाकाम होना चाहिए.'
सैमुअल वेस्ट कहते हैं कि, 'नाकामी से मतलब यह है कि किसी उत्पाद के वैसे नतीजे नहीं आए, जिस तरह की उम्मीद थी.'
सैमुअल ने इस में एक और शर्त जोड़ते हुए कहा कि, 'इस म्यूज़ियम का हिस्सा बनने की तीसरी शर्त ये है कि ये दिलचस्प होना चाहिए.कोई उत्पाद दिलचस्प है या नहीं इसे मैं ही तय करूंगा.'
वो इसकी मिसाल देते हैं, अटारी ई.टी. नाम के वीडियो गेम को. सैमुअल कहते हैं कि इस वीडियो गेम को दुनिया का सबसे वाहियात वीडियो गेम कहा जाता है. लोग इससे नफ़रत करते थे.
वजह यह कि इसका अहम किरदार ई.टी. जब चलता था तो वो अक्सर गड्ढों में ऐसा फंस जाता था कि निकल ही नहीं पाता था. लेकिन, इतने ख़राब वीडियो गेम के भी कुछ लोग ऐसे शैदाई हुए कि आज भी इसकी कॉपी अपने पास रखते हैं.
सैमुअल के म्यूज़ियम में रखी एक और नाकाम चीज़ है सोनी बीटामैक्स. ये टेप रिकॉर्ड प्लेयर था, जो चला ही नहीं.
कहा जाता है कि सोनी ने पोर्न उद्योग को बीटामैक्स इस्तेमाल करने से रोका था. नतीजा ये कि सोनी का बीटामैक्स बुरी तरह नाकाम रहा और इसकी जगह वीएचएस ने बाज़ी मार ली.
म्यूज़ियम में ही बिक नाम का पेन भी है, जिसे ख़ास महिलाओं के लिए बनाया गया था.
सैमुअल वेस्ट कहते हैं कि, ''नाकामी तकलीफ़ देती है. ये हमारे हौसले, हमारे आत्मविश्वास को चोट पहुंचाती है. नाकामी पर हारा हुआ महसूस करना इंसान की बुनियादी फ़ितरत है.''
सैमुअल ने हमें म्यूज़ियम में द रेजुवेनीक़ नाम का एक प्रोडक्ट दिखाया. इसे पहन कर ख़ुद को बिजली का झटका देना होता था, ताकि आप हरदम जवां बने रहें. अब भला इसे कौन ख़रीदता!
फिर यहां पर एक स्नोबोर्ड है, जिसका नाम है द मोनोस्की. इस पर सवारी करना अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती थी. ज़ाहिर है इसे तो नाकाम होना ही था.
सैमुअल हमें अपने म्यूज़ियम में रखी स्पोर्ट्स कार डेलोरियन दिखाते हैं. ये इस क़दर नाकाम साबित हुई थी कि इसे बैक टू द फ्यूचर फ़िल्म का हिस्सा बनाया गया था.
सैमुअल वेस्ट हंसते हुए बताते हैं कि दो कंपनियों ने उनसे संपर्क किया है ताकि उनके नाकाम रहे उत्पादों की नुमाइश न की जाए.
इस म्यूज़ियम के लिए चीज़ें जुटाने का ज़रिया भी मज़ेदार रहा है. कुछ चीज़ें कंपनियों के नाराज़ कर्मचारियों से मिली हैं, तो कुछ को रूसी तस्करों की मदद से हासिल किया गया है.
सैमुअल कहते हैं कि यहां स्वीडन की कई नाकाम चीज़ें हैं. आख़िर ये म्यूज़ियम भी तो स्वीडन में ही है.
इस में सबसे ख़ास है आईटेरा नाम की साइकिल, जो प्लास्टिक की बनी हुई थी. इसे 1982 में बाज़ार में उतारा गया था. आइटेरा चलाते वक़्त इतना लहराती थी कि संतुलन बनाना मुश्किल होता था. ज़ाहिर है इसे कामयाबी मिलनी ही नहीं थी.
स्वीडन में बनी कुछ टॉफ़ी और चॉकलेट भी यहां रखी गई हैं. ये वो उत्पाद हैं जो अमरीकी उत्पादों के मुक़ाबले नहीं टिक सके.
एप्पल कंपनी का न्यूटन नाम का प्रोडक्ट भी यहां रखा है. इसे बनाने में एप्पल कंपनी ने काफ़ी पैसा और वक़्त लगाया था. लेकिन, इसे बाज़ार ने नहीं पसंद किया. गिने-चुने लोगों ने ही इसे ख़रीदा. पर, एप्पल को न्यूटन से ही आईपैड बनाने का रास्ता मिला.
सैमुअल वेस्ट कहते हैं कि यहां आने के बाद लोग अपने आप को क़ैद से आज़ाद हुआ महसूस करते हैं. वो देखते हैं कि जब गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल जैसी कंपनियां नाकाम हो सकती हैं. और नाकामी के बाद ज़बरदस्त सफ़लता हासिल कर सकती हैं. तो, फिर उनके नाकाम होने में भी कोई शर्म नहीं.
इसीलिए, स्वीडन में एक ख़ास म्यूज़ियम खोला गया है, म्यूज़ियम ऑफ़ फेल्योर, यानी नाकामी का अजायबघर.
ये विचित्र म्यूज़ियम स्वीडन के हेलसिंगबोर्ग शहर में है. इस म्यूज़ियम का रख-रखाव करने वाले सैमुअल वेस्ट कहते हैं कि, 'इस म्यूज़ियम का हिस्सा बनने की पहली शर्त है कि कोई भी चीज़ एक आविष्कार होनी चाहिए. दूसरी शर्त है कि उसे नाकाम होना चाहिए.'
सैमुअल वेस्ट कहते हैं कि, 'नाकामी से मतलब यह है कि किसी उत्पाद के वैसे नतीजे नहीं आए, जिस तरह की उम्मीद थी.'
सैमुअल ने इस में एक और शर्त जोड़ते हुए कहा कि, 'इस म्यूज़ियम का हिस्सा बनने की तीसरी शर्त ये है कि ये दिलचस्प होना चाहिए.कोई उत्पाद दिलचस्प है या नहीं इसे मैं ही तय करूंगा.'
वो इसकी मिसाल देते हैं, अटारी ई.टी. नाम के वीडियो गेम को. सैमुअल कहते हैं कि इस वीडियो गेम को दुनिया का सबसे वाहियात वीडियो गेम कहा जाता है. लोग इससे नफ़रत करते थे.
वजह यह कि इसका अहम किरदार ई.टी. जब चलता था तो वो अक्सर गड्ढों में ऐसा फंस जाता था कि निकल ही नहीं पाता था. लेकिन, इतने ख़राब वीडियो गेम के भी कुछ लोग ऐसे शैदाई हुए कि आज भी इसकी कॉपी अपने पास रखते हैं.
सैमुअल के म्यूज़ियम में रखी एक और नाकाम चीज़ है सोनी बीटामैक्स. ये टेप रिकॉर्ड प्लेयर था, जो चला ही नहीं.
कहा जाता है कि सोनी ने पोर्न उद्योग को बीटामैक्स इस्तेमाल करने से रोका था. नतीजा ये कि सोनी का बीटामैक्स बुरी तरह नाकाम रहा और इसकी जगह वीएचएस ने बाज़ी मार ली.
म्यूज़ियम में ही बिक नाम का पेन भी है, जिसे ख़ास महिलाओं के लिए बनाया गया था.
सैमुअल वेस्ट कहते हैं कि, ''नाकामी तकलीफ़ देती है. ये हमारे हौसले, हमारे आत्मविश्वास को चोट पहुंचाती है. नाकामी पर हारा हुआ महसूस करना इंसान की बुनियादी फ़ितरत है.''
सैमुअल ने हमें म्यूज़ियम में द रेजुवेनीक़ नाम का एक प्रोडक्ट दिखाया. इसे पहन कर ख़ुद को बिजली का झटका देना होता था, ताकि आप हरदम जवां बने रहें. अब भला इसे कौन ख़रीदता!
फिर यहां पर एक स्नोबोर्ड है, जिसका नाम है द मोनोस्की. इस पर सवारी करना अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती थी. ज़ाहिर है इसे तो नाकाम होना ही था.
सैमुअल हमें अपने म्यूज़ियम में रखी स्पोर्ट्स कार डेलोरियन दिखाते हैं. ये इस क़दर नाकाम साबित हुई थी कि इसे बैक टू द फ्यूचर फ़िल्म का हिस्सा बनाया गया था.
सैमुअल वेस्ट हंसते हुए बताते हैं कि दो कंपनियों ने उनसे संपर्क किया है ताकि उनके नाकाम रहे उत्पादों की नुमाइश न की जाए.
इस म्यूज़ियम के लिए चीज़ें जुटाने का ज़रिया भी मज़ेदार रहा है. कुछ चीज़ें कंपनियों के नाराज़ कर्मचारियों से मिली हैं, तो कुछ को रूसी तस्करों की मदद से हासिल किया गया है.
सैमुअल कहते हैं कि यहां स्वीडन की कई नाकाम चीज़ें हैं. आख़िर ये म्यूज़ियम भी तो स्वीडन में ही है.
इस में सबसे ख़ास है आईटेरा नाम की साइकिल, जो प्लास्टिक की बनी हुई थी. इसे 1982 में बाज़ार में उतारा गया था. आइटेरा चलाते वक़्त इतना लहराती थी कि संतुलन बनाना मुश्किल होता था. ज़ाहिर है इसे कामयाबी मिलनी ही नहीं थी.
स्वीडन में बनी कुछ टॉफ़ी और चॉकलेट भी यहां रखी गई हैं. ये वो उत्पाद हैं जो अमरीकी उत्पादों के मुक़ाबले नहीं टिक सके.
एप्पल कंपनी का न्यूटन नाम का प्रोडक्ट भी यहां रखा है. इसे बनाने में एप्पल कंपनी ने काफ़ी पैसा और वक़्त लगाया था. लेकिन, इसे बाज़ार ने नहीं पसंद किया. गिने-चुने लोगों ने ही इसे ख़रीदा. पर, एप्पल को न्यूटन से ही आईपैड बनाने का रास्ता मिला.
सैमुअल वेस्ट कहते हैं कि यहां आने के बाद लोग अपने आप को क़ैद से आज़ाद हुआ महसूस करते हैं. वो देखते हैं कि जब गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल जैसी कंपनियां नाकाम हो सकती हैं. और नाकामी के बाद ज़बरदस्त सफ़लता हासिल कर सकती हैं. तो, फिर उनके नाकाम होने में भी कोई शर्म नहीं.
Friday, March 15, 2019
देखें, 27 साल पहले कैसा भाषण देते थे मोदी, BJP बोली- शेरों के तेवर नहीं बदलते
भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी का एक 27 साल पुराना वीडियो जारी किया है. इस वीडियो में नरेंद्र मोदी श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने जा रहे हैं. इस वीडियो में नरेंद्र मोदी जोशीला भाषण देते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो को अपने आधिकारिक ट्वीटर अकाउंट से ट्वीट करते हुए बीजेपी ने लिखा है, "शेरों के तेवर नहीं बदलते."
ये साल था 1992. जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद नया-नया पैर पसार ही रहा था. नरेंद्र मोदी उस वक्त बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की इस टीम के सदस्य थे, जो जबरदस्त आतंक के दौर में श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने जा रही थी. आतंकियों ने बीजेपी नेताओं के इस आह्वान का विरोध किया था और श्रीनगर आने पर हमले की धमकी दी थी.
दरअसल बीजेपी ने कन्याकुमारी से एकता यात्रा शुरू करते हुए 26 जनवरी 1992 में श्रीनगर के दिल लाल चौक पर तिरंगा फहराने का ऐलान किया था. बीजेपी द्वारा जारी ये वीडियो 24 जनवरी 1992 का है. इस वीडियो में भगवा पगड़ी पहने नरेंद्र मोदी कह रहे हैं, "हमारी यात्रा की सफलता ने आतंकियों को परेशान कर रखा है. लाल चौक में पोस्टर्स लगाए हैं, दीवारों पर लिखा है जिन्होंने अपनी मां का दूध पीया है वो श्रीनगर के लाल चौक आएं, आकर भारत का तिरंगा झंडा फहराएं और अगर वो जिंदा वापस जाएगा तो आतंकवादी उसे इनाम देंगे...आतंकवादी कान खोलकर सुन लें, 26 जनवरी को परसों...अब चंद घंटे बाकी हैं...लाल चौक में फैसला हो जाएगा किसने अपनी मां का दूध पीया है."
बता दें कि 26 जनवरी को श्रीनगर के लाल चौक में स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी. आतंकवादियों ने पुलिस मुख्यालय के पास धमाका किया था, जिसमें तत्कालीन पुलिस महानिदेशक जख्मी हो गए थे.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए श्रीनगर प्रशासन ने मुरली मनोहर जोशी, नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के कुछ सीनियर नेताओं को हवाई मार्ग से श्रीनगर पहुंचाया था. लालचौक किले में तब्दील था. चारों ओर सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान तैनात थे. बेहद तनाव और कड़ी सुरक्षा इंतजाम के बीच मुरली मनोहर जोशी और नरेंद्र मोदी ने करीब 15 में तिरंगा फहराया और सकुशल वापस लौटे.
बीजेपी ने इस वीडियो के साथ एक और वीडियो जारी किया है, जो पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान स्थित बालाकोट में भारत द्वारा एयरकोट स्ट्राइक के बाद पीएम के भाषण का है. 4 मार्च 2019 के इस भाषण में गुजरात के अहमदाबाद में पीएम नरेंद्र मोदी कह रहे हैं, " जो आग देशवासियों के दिल में है वो मेरे भी दिल में है...सातवें पाताल में भी जो होंगे उनको भी मैं छोड़ने वाला नहीं हूं. मैं दोस्तो इंतजार लंबा नहीं कर सकता, चुन-चुनकर हिसाब लेना मेरी फितरत है, ये मेरा सिद्धांत है घर में घुसकर हम मारेंगे."
अपनी चिट्ठी में उन्नाव सांसद ने लिखा था कि वह उन्नाव के अलावा किसी और सीट से चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं और अगर उनका टिकट उन्नाव से कटा तो पार्टी को नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं. गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी नहीं की है, खबर है कि शनिवार को पार्टी की पहली लिस्ट आ सकती है.
साक्षी महाराज अपने आक्रामक बयानों को लेकर जाने जाते हैं, फिर चाहे वह राम मंदिर को लेकर दिया गया बयान हो या फिर विपक्षी पार्टियों पर हमले का बयान हो. कई बार उनके बयान पार्टी के लिए चिंता का विषय भी बने हैं.
मनीष सिसोदिया ने पुलिस अधिकारी राजीव रंजन, पंकज सिंह और सतीश गोलचा पर दिल्ली पुलिस के इशारे पर कॉल सेंटर कर्मियों को टॉर्चर करने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से उन्हें सस्पेंड करने की मांग की है. उन्होंने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर 24 लाख वोट गलत तरीके से काटे गए. हमने पहले भी इसकी शिकायत चुनाव से की थी.'
'कॉल सेंटर के मालिकों को मिल रही धमकी'
सिसोदिया ने कहा, 'हमने डोर टू डोर कैंपेन करके नंबर इकट्ठा किया है. अब हम कैंपेनिंग कर रहे हैं और उनके वोट बनवा रहे हैं. हमने उनकी मदद की है लोगों ने अपना वोट भी बनवाया है. लेकिन जिस कॉल सेंटर के जरिए हम यह अभियान चला रहे थे. दिल्ली पुलिस भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर उस कॉल सेंटर को रोजाना रेट कर रही है. रोजाना कॉल सेंटर के मालिकों को दफ्तर में बिठाकर परेशान किया जाता है. उन्हें धमकाया जाता है कि अगर आम आदमी पार्टी के लिए काम करना बंद नहीं किया तो तुम्हें ठोक देंगे बर्बाद कर देंगे. रोजाना दिल्ली पुलिस की यह करतूत चल रही है. अब जबकि देश में चुनाव आचार संहिता लग चुकी है सभी पार्टियों को सुगम चुनाव करने का वातावरण देना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है.'
ये साल था 1992. जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद नया-नया पैर पसार ही रहा था. नरेंद्र मोदी उस वक्त बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की इस टीम के सदस्य थे, जो जबरदस्त आतंक के दौर में श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने जा रही थी. आतंकियों ने बीजेपी नेताओं के इस आह्वान का विरोध किया था और श्रीनगर आने पर हमले की धमकी दी थी.
दरअसल बीजेपी ने कन्याकुमारी से एकता यात्रा शुरू करते हुए 26 जनवरी 1992 में श्रीनगर के दिल लाल चौक पर तिरंगा फहराने का ऐलान किया था. बीजेपी द्वारा जारी ये वीडियो 24 जनवरी 1992 का है. इस वीडियो में भगवा पगड़ी पहने नरेंद्र मोदी कह रहे हैं, "हमारी यात्रा की सफलता ने आतंकियों को परेशान कर रखा है. लाल चौक में पोस्टर्स लगाए हैं, दीवारों पर लिखा है जिन्होंने अपनी मां का दूध पीया है वो श्रीनगर के लाल चौक आएं, आकर भारत का तिरंगा झंडा फहराएं और अगर वो जिंदा वापस जाएगा तो आतंकवादी उसे इनाम देंगे...आतंकवादी कान खोलकर सुन लें, 26 जनवरी को परसों...अब चंद घंटे बाकी हैं...लाल चौक में फैसला हो जाएगा किसने अपनी मां का दूध पीया है."
बता दें कि 26 जनवरी को श्रीनगर के लाल चौक में स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी. आतंकवादियों ने पुलिस मुख्यालय के पास धमाका किया था, जिसमें तत्कालीन पुलिस महानिदेशक जख्मी हो गए थे.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए श्रीनगर प्रशासन ने मुरली मनोहर जोशी, नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के कुछ सीनियर नेताओं को हवाई मार्ग से श्रीनगर पहुंचाया था. लालचौक किले में तब्दील था. चारों ओर सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान तैनात थे. बेहद तनाव और कड़ी सुरक्षा इंतजाम के बीच मुरली मनोहर जोशी और नरेंद्र मोदी ने करीब 15 में तिरंगा फहराया और सकुशल वापस लौटे.
बीजेपी ने इस वीडियो के साथ एक और वीडियो जारी किया है, जो पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान स्थित बालाकोट में भारत द्वारा एयरकोट स्ट्राइक के बाद पीएम के भाषण का है. 4 मार्च 2019 के इस भाषण में गुजरात के अहमदाबाद में पीएम नरेंद्र मोदी कह रहे हैं, " जो आग देशवासियों के दिल में है वो मेरे भी दिल में है...सातवें पाताल में भी जो होंगे उनको भी मैं छोड़ने वाला नहीं हूं. मैं दोस्तो इंतजार लंबा नहीं कर सकता, चुन-चुनकर हिसाब लेना मेरी फितरत है, ये मेरा सिद्धांत है घर में घुसकर हम मारेंगे."
अपनी चिट्ठी में उन्नाव सांसद ने लिखा था कि वह उन्नाव के अलावा किसी और सीट से चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं और अगर उनका टिकट उन्नाव से कटा तो पार्टी को नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं. गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी नहीं की है, खबर है कि शनिवार को पार्टी की पहली लिस्ट आ सकती है.
साक्षी महाराज अपने आक्रामक बयानों को लेकर जाने जाते हैं, फिर चाहे वह राम मंदिर को लेकर दिया गया बयान हो या फिर विपक्षी पार्टियों पर हमले का बयान हो. कई बार उनके बयान पार्टी के लिए चिंता का विषय भी बने हैं.
मनीष सिसोदिया ने पुलिस अधिकारी राजीव रंजन, पंकज सिंह और सतीश गोलचा पर दिल्ली पुलिस के इशारे पर कॉल सेंटर कर्मियों को टॉर्चर करने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से उन्हें सस्पेंड करने की मांग की है. उन्होंने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर 24 लाख वोट गलत तरीके से काटे गए. हमने पहले भी इसकी शिकायत चुनाव से की थी.'
'कॉल सेंटर के मालिकों को मिल रही धमकी'
सिसोदिया ने कहा, 'हमने डोर टू डोर कैंपेन करके नंबर इकट्ठा किया है. अब हम कैंपेनिंग कर रहे हैं और उनके वोट बनवा रहे हैं. हमने उनकी मदद की है लोगों ने अपना वोट भी बनवाया है. लेकिन जिस कॉल सेंटर के जरिए हम यह अभियान चला रहे थे. दिल्ली पुलिस भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर उस कॉल सेंटर को रोजाना रेट कर रही है. रोजाना कॉल सेंटर के मालिकों को दफ्तर में बिठाकर परेशान किया जाता है. उन्हें धमकाया जाता है कि अगर आम आदमी पार्टी के लिए काम करना बंद नहीं किया तो तुम्हें ठोक देंगे बर्बाद कर देंगे. रोजाना दिल्ली पुलिस की यह करतूत चल रही है. अब जबकि देश में चुनाव आचार संहिता लग चुकी है सभी पार्टियों को सुगम चुनाव करने का वातावरण देना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है.'
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